भारत में गेहूं की खेती किसानों के लिए आय का प्रमुख स्रोत है। यह न सिर्फ देश की खाद्य सुरक्षा को बनाए रखता है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करता है। ऐसे में, गेहूं की नई और उन्नत किस्मों का विकास कृषि वैज्ञानिकों का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रहा है। PBW 826 गेहूं की एक ऐसी ही उन्नत किस्म है, जो अपनी उच्च पैदावार, रोग प्रतिरोधक क्षमता, और अनुकूलन क्षमता के लिए जानी जाती है। यह लेख PBW 826 किस्म की विस्तृत जानकारी, इसके फायदे, और खेती के तरीकों को सरल हिंदी में समझाएगा।
PBW 826 किस्म क्या है?
PBW 826 गेहूं की एक उन्नत बौनी किस्म (Dwarf Variety) है, जिसे पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना द्वारा विकसित किया गया है। इसे 2019 में भारत के उत्तरी क्षेत्रों (पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, और राजस्थान) के लिए अधिसूचित किया गया था। यह किस्म PBW 725 और PBW 773 जैसी पुरानी किस्मों की तुलना में अधिक उत्पादन क्षमता और बेहतर गुणवत्ता प्रदान करती है।
PBW 826 की प्रमुख विशेषताएं
- उच्च पैदावार:
- इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 65-70 क्विंटल तक उपज प्राप्त की जा सकती है।
- अनुकूल मौसम और उचित देखभाल से यह 75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार दे सकती है।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता:
- पीली कंगियारी (Yellow Rust): PBW 826 में इस रोग के प्रति उच्च प्रतिरोधकता है।
- काला किट्ट (Karnal Bunt): इस किस्म में इस रोग का प्रकोप भी कम देखा गया है।
- पौधे की संरचना:
- पौधे की औसत ऊंचाई 95-100 सेमी होती है, जो इसे गिरने (Lodging) से बचाती है।
- दाने मध्यम आकार के, सुनहरे रंग के, और अच्छे चपाती वाले गुणवत्ता वाले होते हैं।
- पकने की अवधि:
- बुवाई के बाद 155-160 दिन में फसल पककर तैयार हो जाती है।
PBW 826 की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
- जलवायु: यह किस्म समय पर बुवाई (Timely Sowing) के लिए उपयुक्त है।
- बुवाई का सही समय: उत्तर भारत में नवंबर के पहले पखवाड़े में बुवाई करें।
- तापमान: अंकुरण के लिए 20-25°C और पकते समय शुष्क मौसम आदर्श है।
- मिट्टी: दोमट मिट्टी (Loam Soil) जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, सर्वोत्तम है।
- मिट्टी का pH मान 6.5-7.5 के बीच होना चाहिए।
खेती की विधि और प्रबंधन
- बीज की मात्रा और उपचार:
- प्रति एकड़ 40-45 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है।
- बुवाई से पहले बीज को कार्बेन्डाजिम या थीरम से उपचारित करें।
- खाद और उर्वरक:
- नाइट्रोजन (N): 120-150 किलोग्राम/हेक्टेयर (बुवाई और बाद में टॉप ड्रेसिंग में)।
- फॉस्फोरस (P): 60 किलोग्राम/हेक्टेयर।
- पोटाश (K): 40 किलोग्राम/हेक्टेयर।
- सिंचाई:
- पहली सिंचाई बुवाई के 21-25 दिन बाद करें।
- कुल 4-5 सिंचाइयाँ (कल्ले निकलते समय, बाली बनते समय, दाना भरते समय)।
- खरपतवार नियंत्रण:
- खरपतवारनाशी दवाएं: पेंडीमेथालिन (बुवाई के 2-3 दिन बाद) या सल्फोसल्फ्यूरॉन (खरपतवार दिखने पर)।
PBW 826 के फायदे
- कम लागत, अधिक मुनाफा: उच्च उत्पादन और रोग प्रतिरोधकता से किसानों की लागत कम होती है।
- बाजार में मांग: इसके दाने चपाती बनाने के लिए उत्तम माने जाते हैं, इसलिए बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
- जलवायु अनुकूलन: समय पर बुवाई वाले क्षेत्रों के साथ-साथ सीमित पानी वाले इलाकों में भी उगाई जा सकती है।
ध्यान देने योग्य बातें
- देर से बुवाई न करें: यह किस्म समय पर बुवाई के लिए ही उपयुक्त है। देर से बुवाई करने पर पैदावार कम हो सकती है।
- कीट नियंत्रण: एफिड्स और टर्माइट्स से बचाव के लिए नीम आधारित कीटनाशकों का उपयोग करें।
PBW 826 vs अन्य किस्में
विशेषता | PBW 826 | PBW 725 | HD 3086 |
---|---|---|---|
पैदावार (क्विंटल/हेक्टेयर) | 65-70 | 60-65 | 55-60 |
रोग प्रतिरोधकता | पीली कंगियारी, काला किट्ट | केवल पीली कंगियारी | सीमित प्रतिरोधकता |
पकने की अवधि | 155-160 दिन | 160-165 दिन | 150-155 दिन |
निष्कर्ष
PBW 826 गेहूं की वह किस्म है जो किसानों को कम संसाधनों में अधिक मुनाफा देने का वादा करती है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और उच्च उत्पादन इसे पंजाब, हरियाणा, और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच लोकप्रिय बनाती है। हालांकि, सफलता के लिए सही समय पर बुवाई, संतुलित खाद प्रबंधन, और नियमित निगरानी जरूरी है। अगर आप गेहूं की खेती करते हैं, तो PBW 826 को एक बार अवश्य आजमाएं!
कहां से मिलेगा बीज?
PBW 826 के प्रमाणित बीज पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना या राज्य सरकार के कृषि विभाग से प्राप्त किए जा सकते हैं। निजी कंपनियों द्वारा भी यह बीज बाजार में उपलब्ध है।
संपर्क सूचना:
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना
वेबसाइट: www.pau.edu
यह लेख PBW 826 गेहूं की किस्म की पूरी जानकारी सरल हिंदी में देता है। इसे अपने किसान मित्रों के साथ साझा करें और उन्नत खेती को बढ़ावा दें!